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Happy HOLI 2022 | Origin of Holi | How Holi is Celebrated at Different Regions of India | Hindi

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Blogscart family wishing you all a very Happy Holi 2022 enjoy this festival of colours with your family, friends and all the loved ones and also with your one favorite strict uncle who never gave you your ball.😜
Bura na maano Holi hai!

Happy Holi 2022 written by Nandita

 

आप सभी के जीवन में रंगों का गुबार हो,हर्षोल्लास हो, होली का मिठास हो, रंगों की महक और फूलों की खुशबू हो, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ होली की बहुत-बहुत बधाई।

 

     दोस्तों आज हम होली की बात करते हैं जैसा कि आपको पता है कि  इस बार 17, 18, 19 मार्च की होली है । होली के बारे में जैसा आप सभी जानते हैं कि यह रंगों का त्योहार है। यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है । होली एक दिन का नहीं बल्कि 40 दिनों का एक रंगीन त्यौहार है। अधिकतर लोग इसको दो दिन ही मनाते हैं । एक दिन होलिका और दूसरे दिन रंग वाली होली होती है। 

     लेकिन ब्रज में यह होली का त्यौहार बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाता है और रंग पंचमी तक मनाया जाता है। परंतु आज के समय में होली होलाष्टक से लेकर पूर्णिमा तक यह त्यौहार मनाया जाता है। होली से आठ दिन पहले के दिन अशुभ माने जाते है। इस समय कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता। 

 

     कहा जाता है कि श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ आठ दिनों तक होली खेली और होलिका के दिन रंग भरे वस्त्रों को अग्नि के हवाले कर दिया। तभी से यह होलिका का पर्व मनाया जाता है । 

 

पौराणिक कथा:

     मान्यताओं के अनुसार राजा हिरणाकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। उनकी अराधना में ही अपना पूरा दिन व्यतीत करता था। यह बात राजा को  बिल्कुल भी पसंद नहीं आती थी ।राजा ने उसे मारने के लिए आठ दिनों तक यातनाएं दीं।( इसीलिए यह आठ दिन अशुभ माने जाते हैं)।परंतु उसको जरा भी हानि नहीं पहुंची। प्रहलाद की बुआ होलिका को ना जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई परंतु सत्य की विजय हुई। प्रह्लाद का बाल बांका भी ना हुआ और होलिका आग में जलकर राख हो गई। हमारे सभी त्यौहार हमें संदेश देते हैं कि अंत में सच्चाई की ही विजय होती है।

     पुरानी मान्यताओं के अनुसार एक कहानी यह भी कही जाती है की मां गौरी शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए तप कर रही थी तथा शिवजी अपने ध्यान में मग्न थे। उधर तारकासुर ने सभी देवताओं को परेशान कर रखा था तथा उसका आतंक चरम पर था।उसकी मृत्यु केवल शिवजी के पुत्र द्वारा ही संभव थी परंतु शिवजी ध्यान मग्न थे, उनका गौरी माता पर ध्यान ही नहीं जा रहा था देवगण इस कारण बहुत परेशान थे।

     उन्होंने कामदेव से सहायता मांगी कि वह शिव जी का ध्यान भंग करे। कामदेव ने आठ दिनों तक तरह-तरह से कोशिश की तथा अंत में उन्होंने शिवजी पर कामबाण छोड़ दिया। जिससे उनकी तपस्या भंग हो गई। शिव जी का तीसरा नेत्र खुल गया और उनका क्रोध जागृत हो गया। उन्होंने कामदेव को भस्म कर दिया। वह दिन फाल्गुन अष्टमी का था। जिसे होलाष्टक कहते हैं। बाद में सभी देवताओं ने उन्हें तपस्या भंग करने का कारण बताया। तब शिवजी ने गौरा मां की तरफ ध्यान दिया । तभी से लोग काम, क्रोध, मोह, रोग, दोष आदि का होलिका दहन करने लगे। तभी से यह होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है।

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ब्रज की होली (Braj Holi)

     ब्रज में होली होलाष्टक से शुरू हो जाती है और रंग पंचमी के बाद समाप्त होती हैं।

     ब्रज की होली देश-विदेश में बहुत प्रचलित है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां होली मनाने आते हैं। यहां पर बरसाने की लड्डू होली, बरसाने की लट्ठमार होली, नंदगांव की लट्ठमार होली, गोकुल की छड़ी मार होली, वृंदावन में फूलों की होली और बांके बिहारी मंदिर की रंगभरनी एकादशी बहुत ही प्रसिद्ध है।

 

बरसाने की लड्डू होली (Barsane ki Laddu Holi)

     राधा अष्टमी के दिन श्रीराधा रानी के मंदिर में लड्डूओ की वर्षा भक्तों पर  की जाती है । सभी भक्तों में उन्हें पकड़ने की होड़ लगी रहती है। लोग इन्हें प्रसाद समझकर अपनी झोली में रखते हैं तथा इसको ग्रहण करते हैं।

 

बरसाने की लट्ठमार होली (Barsane ki Lath Maar Holi)

     कहा जाता है कि जब कान्हा नंद गांव में रहा करते थे तब वहां के कई पुरुष बरसाने की महिलाओं के साथ होली खेलने जाया करते थे। तब वहां की महिलाए उन्हें लट्ठ मारकर भगाया करती थी। इसीलिए इन पुरुषों को हुरियारे कहा जाता है और आज भी यह होली बरसाने में खेली जाती है। जिसमें महिलाएं पुरुषों पर लट्ठ से वार करती है तथा पुरुष वार से बचने के लिए हाथों में ढाल लिए रहते हैं।

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नंदगांव की लठमार होली (Nandgaon ki Lath Maar Holi)

     बरसाने की लट्ठमार होली के अगले दिन नंदगांव में लट्ठमार होली होती है। बरसाने के पुरुष नंद गांव की महिलाएं से होली खेलने आते हैं।नंदगांव की महिलाएं बरसाने के हुरियारों (पुरुषों) पर लाठी से वार करती हैं ठीक उसी प्रकार जैसे बरसाने में होता है।

 

गोकुल की छड़ीमार होली (Gokul ki Chadhi Maar Holi)

     गोकुल में कान्हा छोटे थे और होली खेलने जाते थे तो महिलाएं उन्हें छोटे होने के कारण लट्ठ से नही मरती थी बल्कि उन्हें छड़ी से मारकर भगाती थी। तभी से गोकुल की छड़ी मार होली प्रसिद्ध है।

 

वृंदावन की फूलों की होली (Flower Holi of Vrindavan)

वृंदावन की फूलों की  होली जगप्रसिद्ध है। यह होली वृंदावन के मंदिरों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है । इसमें भक्तों पर फूलों की वर्षा की जाती है। देश विदेश से भक्तों का हुजूम वृंदावन फूलों की होली खेलने के लिऐ आता हैं।

 

बांके बिहारी मंदिर की रंगभरनी एकादशी (Banke Bihari Mandir ki Rangbhari Ekadashi)

     रंगभरनी एकादशी बांके बिहारी जी के मंदिर में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। चारों ओर रंगों की वर्षा की जाती है । भक्तों पर रंग गुलाल उड़ेले जाते हैं ।होलिका दहन वाले दिन दूर दूर से लोग यहां होली खेलने आते हैं।

     होली सभी असमानताओं को भुलाकर सभी को एक रंग में रंग देती है।ये आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देती हैं। त्योहार हमे खुशियां प्रदान करते हैं। हमे अपने सभी त्योहारों को पूरी परंपरा और रितिरिवाजो के साथ मनाना चाहिए।इस दिन के मिष्ठानो की बात ही क्या  वाह वाह ….गुजीया, मालपुए, खीर, कचोरिया |

वाह वाह! 👌

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Kavita
Kavita
2 years ago

happy holi to all

shree
shree
2 years ago

happy n joyous holi

Deva
Deva
2 years ago

happy Holi

Written by Nandita Shukla

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