in ,

CuteCute OMGOMG LoveLove GeekyGeeky LOLLOL

Mera Natkhat Bachpan | मेरा नटखट-बचपन | Mischievous Childhood Memories | 2nd Poem by Ragini Maam | Hindi

mera natkhat bachpan, मेरा नटखट-बचपन, hindi poem, poem by Ragini Maam, blogscart poem, blogscart-poem, childhood memories, mischievous childhood memory, naughty kid
Created using Canva | Pexels Integration
Share with your friends

Mera Natkhat Bachpan

Read this article on Mera Natkhat Bachpan – Childhood Memories by Ragini Bindal and share it with your friends, and don’t forget to share your valuable comments in the comment section below to motivate and appreciate their amazing work.

मेरा नटखट बचपन ||

अपने बचपन से तुमको मिलवाती हूं,

कितनी नटखट थी मैं तुमको बताती हूं,

कौन सी घटना में बयां करूं,

किस्से मेरे कितने अनोखे कैसे बताऊं |

 

यह बात उन दिनों की है

जब गर्मी में बहुत गर्मी होती थी

हवा नहीं होती थी तब ऐसी और कूलर की

गर्मी में हम पानी छिड़कते थे,

और जल्दी से जल्दी चिक और पर्दे डाल देते थे |

 

यह भी बात है ऐसे ही एक दोपहरी की

जब मैंने भाइयों के संग मिलकर

शरारत की जहरीली थी |

मां तो मेरी थी नहीं, नानी संग रहती थी

बूढ़ी वह इतनी झुक कर चलती थी |

 

लेट गए थे सब कमरों में करने को आराम

हम भी मस्ती कर रहे थे पूरी घमासान,

खरबूजे खाकर धोए थे बीज नानी ने

छुप छुप कर खा रहे थे बीज छेड़खानी में |

 

नानी थकी थी, उस पर बूढ़ी थी

मुंह खोल कर सोती थी

क्योंकि बत्तीसी की कमी थी

खुराफात दिमाग में ऐसी आई

मुट्ठी भर बीज में ले आई |

 

दोनों को दिखा कर मैं बोली

देखो बीज पुलिया  में कैसे जाएं

आओ तुमको इसका खेल दिखाए

वह भी दोनों थे पूरे महाकाल

कहने लगे करके दिखा अपना कमाल |

mera natkhat bachpan, naughty kid, मेरा नटखट-बचपन, hindi poem, poem by Ragini Maam, blogscart poem, blogscart-poem, childhood memories, mischievous childhood memory
Created using Canva | Pexels Integration

आव देखा ना ताव बीज भरे नानी के मुंह में

पहुंचे बीज मुंह के जरिए उनके गले में

खो खो कर के उठी नानी परेशानी में,

दोनों भाग कर छुप गए,

मैं पकड़ी गई नादानी में |

 

पूछो ना फिर क्या हाल हुआ

दो थप्पड पड़े कमर पर खाना भी नसीब ना हुआ,

पर क्या जनाब: हम भी चिकने घड़े थे

थोड़ा रो धो कर फिर शरारत करने खड़े थे | 

 

अब तो यादें रह गई हैं उस जमाने की

खुले खुले घर, सहन और आंगनबाड़े की,

कौन करता है अब शरारत उस जमाने की

अब तो बचपन गुम हो रहा है साजो सामान पर |

 

एसी कूलर की हवा में, बंद खिड़की दरवाजे है

मोबाइल पर गड़ी नजरें, आंखों पर चश्मा साजे हैं

खुद हंसते हैं और रिश्ते दूर करते हैं

अपनों में भी अपनों के बीच अकेले हैं

पर सोशल मीडिया से पक्के रिश्ते हैं |

Do comment your thoughts on this amazing poem Mera Natkhat Bachpan (Childhood memories) by Ragini Maam in the comment section below and share as much possible.

Stay tuned for more amazing stories, poems & articles like this.

For sponsor any article or your article you can mail us with your logo ready and details.

Our Officials


Share with your friends

Report

What do you think?

21 Points
Upvote Downvote
Subscribe
Notify of
guest
5 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Vibha Singh
3 months ago

very nice

Sheetal Parmar
Sheetal Parmar
3 months ago

Amazing poem mam 😍🥰

Bournfiesta
3 months ago

Haha…can’t stop laughing…u were always like this

Shubhi gupta
Shubhi gupta
3 months ago

Wow…my rockstar

Pallavi
Pallavi
3 months ago

Omg, it’s amazing . mam u r brilliant teacher as well a brilliant writer also 🎊

Written by Ragini Bindal

Teacher and Story-teller
I give words to thoughts

Development Notes, NCERT Class 10th Economics Chapter 1 Development Notes by Vibha Maam, Class 10th Economics Chapter 1 Development Notes, Notes by Vibha Maam, sst notes, class 10 eco notes, economics chapter 1 note, class 10 economics lesson 1 notes

NCERT Class 10th Economics Chapter 1 Development Notes by Vibha Maam CBSE | English

The French Revolution Notes, history class 9 notes, chapter 1 history class 9 notes, The French Revolution Notes,Class 9th History Chapter 1, NCERT Class 9th History Chapter 1 The French Revolution Notes, blogscart notes, vibha mam

NCERT Class 9th History Chapter 1 The French Revolution Notes by Vibha Maam CBSE | English