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पिता ? Father? Value of father in our life? Hindi Article

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क्या हम पिता को जानते हैं ?

  • क्या हम पिता को समझते हैं?

 बाइबिल में पिता द्वारा सिखाई प्रार्थना है।

″ हे हमारे पिता जो स्वर्ग में है तेरा नाम पवित्र किया जाए तेरा राज्य आए तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में है वैसे इस पृथ्वी पर भी पूरी हो हमारा प्रतिदिन का आहार आज हमें दें और हमारे अपराध हमें क्षमा कर जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं और हमें परीक्षा में ना डाल परंतु बुराई से हमें बचा।

यह प्रार्थना हमें स्वर्ग में उपस्थित ईश्वर के इकलौते पुत्र द्वारा मनुष्यों को सिखाई गई है एकलौता पुत्र अर्थात् ईसा मसीह जिन्होंने अपने पिता की इच्छा पूरी करने हेतु इस संसार के पापों के नाश तथा मनुष्य जाति को बचाने तथा उनका उद्धार करने के लिए अपने आप को क्रूस पर चढ़वा दिया। पिता ने उन्हें तीसरे दिन फिर जिलाया तथा मनुष्यों का उद्धार करता बनाया।

 आज हम उसी पिता के मानव रूपी स्वरूप जिसने हमें पाला ,पोसा है।

 क्या हम उसे जानते हैं ?

क्या हम उसे समझते हैं?

चलिये। आज हम इस लेख के माध्यम से उसे जानने की कोशिश करते हैं

बच्चा जब छोटा होता है तो पूर्ण रूप से अपने पिता पर आश्रित होता है वह उसके लिए खान-पान, कपड़ा आदि का प्रबंध करता है। जिसके लिए उसे कठिन परिश्रम करना पड़ता है तथा शाम को अपने बच्चे की एक मुस्कान के लिए वह इंसान से एक जानवर

घोड़ा बन कर उसे अपनी कमर पर बैठाकर घुमाता है बच्चा बहुत आनंदित होता है वह उसे और खुश करने के लिएअपने कंधे पर बिठाकर घुमाता है दूर तक सैर कराता है।

 उसे हवा में उछालता है बच्चा जब हवा में होता है तो उसे नीचे गिरने का भय नहीं होता है। बल्कि वह आनंदित होकर हंसता है और कहता है कि पिताजी एक बार और मजा आ गया क्योंकि वह जानता है ।वह एक सुरक्षित हाथों में है।

वह एक पिता के हाथों में है जो उसे चोट तो क्या, खरोच भी नहीं आने देगा। इसलिए वह आनंद का अनुभव करता है। क्योंकि यह उसका अपने पिता पर पूर्ण विश्वास है।

 जो ईसा मसीह को अपने पिता अर्थात ईश्वर पर था।

फिर बच्चा बड़ा होता है वह स्कूल जाना प्रारंभ करता है। उसके लिए उसका पिता स्कूल के कपड़े ,जूते, पुस्तके, बैग आदि का प्रबंध करता है ।तथा अच्छे से अच्छे महंगे स्कूल में उसका प्रवेश करवाता है। ताकि वह अच्छे ज्ञान को ग्रहण कर अच्छा इंसान बने। उसके लिए प्रतिमाह एक अच्छी पूंजी खर्च करता है ।तथा उसके भविष्य के विषय में हमेशा चिंतित रहता है।

बच्चा और बड़ा होता है उसकी इच्छाएं तथा जरूरतें भी बढ़ती हैं लेकिन पिता की कमाई नहीं बढ़ती बच्चा अपने पिता से अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कहता है। पिता अपने बच्चे की जरूरतों को एक डायरी में लिखता है ।कि आज मेरे बच्चे को यह चाहिए। उसके विकास में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। अगले दिन वह अपने बच्चे की हर जरूरत का ध्यान रखते हुए उसकी जरूरतों  को पहले ही पूरा करता है।

 हम सभी जानते हैं की इच्छा एक ऐसी चीज है। जो पूर्ण होने पर और बढ़ती है ।

पिता एक बच्चे की इन सभी इच्छाओं को पूर्ण करने का एकमात्र साधन होता है। पिता अपने बच्चों की इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए दिन रात मेहनत करता है ।वह स्वयं एक ही कपड़े पहन कर काम पर जाता है। लेकिन अपने बच्चे को स्कूल जाने के लिए दो से तीन प्रकार की ड्रेस, जूते देता है। ताकि मेरे बच्चे को कोई कुछ ना कहें।

 बच्चा और बड़ा होता है। वह इंटर कॉलेज में पहुंच जाता है। पिता भी कुछ बुजुर्ग की श्रेणी में आ जाता है।

अब बच्चा ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन मांगता है। स्कूल जाने के लिए साइकिल मांगता है। पिता उसे यह सब देता है। ताकि उसके विकास में कोई कमी ना रहे। फिर बच्चा और बड़ा होता है।

डिग्री कॉलेज में पढ़ाई के लिए जाता है। तथा पिता से लैपटाप तथा बाइक की मांग करता है तथा प्रतिदिन जेब खर्च को भी मांगता है। पिता पहले से भी और कमजोर हो चुका है। पर कमाई के साधन वही है। फिर भी वह अपनी डायरी में उसकी इच्छा को लिखता है।ताकि वह बच्चे की जरूरतों को ना भूले पिता बुखार में है। और बच्चा उससे लैपटॉप मांगता है। पिता कहता है कि बेटा बाद में ला दूंगा बच्चा कहता है। कि मेरे सभी दोस्त स्कूल में लैपटॉप लाते हैं। मैं भी कल लैपटॉप ले जाऊंगा यह कहकर बच्चा बाहर चला जाता है। वह शाम को बारिश में भीग कर  घर वापस आता है।और उसके कपड़े ,जूते सब भीग जाते हैं।

पिता को बुखार में देख ,मां से पूछता है। कि पिताजी लैपटॉप ले आए क्या ? मां कहती है। बेटा तुम्हारे पिता को बुखार है। उनके लिए डॉक्टर से दवा ला दो। बेटा कहता है मां मैं पूरा भीग चुका हूं। तुम ही ले आओ मां कहती है। बेटा मुझे तुम्हारे लिए खाना भी तो बनाना है। बेटा जल्दी से कपड़े बदलता है। तथा अपने पिता के जूते पहन कर जल्दी से दवाई लेने चला जाता है। जब वह बाहर जाता है। तो उसके पैर में पत्थर छुप जाता है। पत्थर चुभने पर वह देखता है। कि जूते के तलवों में छेद है। वह दवा लेकर घर वापस आता है। तो पिताजी को घर पर नहीं पाता तथा उनकी डायरी वहां रखी होती है।

वह उस डायरी को पढता है उसमें लिखा होता है कि आज मेरे बेटे ने झुनझुना मांगा कल मुझे अपने बेटे को यह देना है। बेटे को स्कूल के कपड़े ,कॉपी ,किताबें, लाके देनी है। उसे फोन देना है, उसे साइकल देनी है, उसे घड़ी देनी है। तथा अंतिम पेज पर लिखा था कि मुझे कल अपने बेटे को लैपटॉप देना है। पर उस डायरी में यह कहीं नहीं लिखा था कि मुझे कल नए जूते भी लेने हैं। उसमें सिर्फ अपने बच्चे के लिए ही बातें लिखी थी ।कहीं यह नहीं लिखा था कि मुझे नए कपड़े ,नयी चीजें लेनी है। ऐसा होता है पिता जो अपने बच्चों के लिए ही जीता है। एक पिता अपने बच्चे को हर खुशी देने का संभव प्रयास करता है कभी अपने बारे में नहीं सोचता। बाजार से कुछ लाता है।तो यही सोचता है कि मेरे बच्चे को क्या पसंद है वह वही लेकर चलता है। तथा उसकी खुशी में ही खुश होता है।

 ऐसा होता है पिता।

 क्या आप अभी नहीं समझे।

 उस पिता को !

 क्या आप नहीं समझे! 

अपनी अपने पिता के प्रति जिम्मेदारी को अगर आप समझदार हैं। और ह्रदय आपके पास है। तो मुझे एक पिता के विषय में और लिखने की जरूरत नहीं है। अन्यथा यह सब लिखा भी आपके लिए सिर्फ एक लेख है। 

सचिन कुमार सिंह आपका अपना!!!!!!!!!

Stay tuned for more articles!

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Apoorva
7 months ago

Really,heart touching one!❤️❤️❤️

Sachin
7 months ago

Written by pioneer

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